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GURUTVA JYOTISH
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Thursday, June 16, 2011
Monday, June 6, 2011
Friday, June 3, 2011
चुटकुले
चुटकुले
बूढ़ा:साईकिल चला रहा था आगे से जा रही लड़की पे साईकिल गिरा देता है
लड़की :कम से कम घंटी नहीं मार सकते थे
बूढ़ा :मेने तो पूरी साईकिल मार दी अभी भी घंटी बाकि है
एक दोस्त दुसरे दोस्त को : आज कल तू बड़ा दुखी रहता है क्या बात है
दोस्त : जब भी शादी में जाता हु सभी बुढ़िया कोहनी मार के बोलती है अब
तेरी बारी है
दो दिन बाद
पहला दोस्त : यार आज खुश है क्या हुआ
दोस्त : मुझे कोई अब तंग नहीं करता
पहला दोस्त : क्यों
दोस्त: जब कभी अफ़सोस करने जाता हु तो में भी कोहनी मार के बोल्देता हु
अब तेरी बारी है
एक गायिकी प्रतियोगिता में एक बूढ़ा गाने के लिए स्टेज में जाता है
बूढ़ा : जैसे ही गाने को शुरू होता है वैसे ही उसके दांत गिर गए
दांत को लगा कर फिर से गाना शुरू किया फिर दांत गिर गए
एक आदमी परेशान होकर : ओ ताऊ केसीट ही बदल ता रहे गा या
गाये गा भी
रेकी का इतिहास
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रेकी का इतिहास
हमारा देश आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्ना देश है। हजारों वर्ष पूर्व भारत में स्पर्श चिकित्सा का ज्ञान था। अथर्ववेद में इसके प्रमाण पाए गए हैं, किंतु गुरु-शिष्य परंपरा के कारण यह विद्या मौखिक रूप से ही रही। लिखित में यह विद्या न होने से धीरे-धीरे इस विद्या का लोप होता चला गया। 2500 वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने ये विद्या अपने शिष्यों को सिखाई ताकि देशाटन के समय जंगलों में घूमते हुए उन्हें चिकित्सा सुविधा का अभाव न हो और वे अपना उपचार कर सकें। भगवान बुद्ध की 'कमल सूत्र' नामक किताब में इसका कुछ वर्णन है।
19वीं शताब्दी में जापान के डॉ. मिकाओ उसुई ने इस विद्या की पुनः खोज की और आज यह विद्या रेकी के रूप में पूरे विश्र्व में फैल गई है। डॉ. मिकाओ उसुई की इस चमत्कारिक खोज ने 'स्पर्श चिकित्सा' के रूप में संपूर्ण विश्व को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान की है।
रेकी सीखने के लाभ
1. यह शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्तरों को प्रभावित करती है।
2. शरीर की अवरुद्ध ऊर्जा को सुचारुता प्रदान करती है।
3. शरीर में व्याप्त नकारात्मक प्रवाह को दूर करती है।
4. अतीद्रिंय मानसिक शक्तियों को बढ़ाती है।
5. शरीर की रोगों से लड़ने वाली शक्ति को प्रभावी बनाती है।
6. ध्यान लगाने के लिए सहायक होती है।
7. समक्ष एवं परोक्ष उपचार करती है।
8. सजीव एवं निर्जीव सभी का उपचार करती है।
9. रोग का समूल उपचार करती है।
10. पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करती है।
रेकी की पात्रता
कोई भी व्यक्ति रेकी सीख सकता है। यह व्यक्ति के बौद्धिक, शैक्षणिक या आध्यात्मिक स्तर पर निर्भर नहीं है, न ही इसे सीखने के लिए उम्र का बंधन है। कोई भी व्यक्ति इसे सीख सकता है। इसे सीखने के लिए वर्षों का अभ्यास नहीं चाहिए न ही रेकी उपचारक की व्यक्तिगत स्थिति के कारण उपचार पर कोई प्रभाव पड़ता है। यह क्षमता रेकी प्रशिक्षक के द्वारा उसके प्रशिक्षार्थी में सुसंगतता (एट्यूनमेंट) के माध्यम से उपलब्ध होती है, इसके प्राप्त होते ही व्यक्ति के दोनों हाथों से ऊर्जा का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है और इस तरह वह स्वयं का तथा दूसरों का भी उपचार कर सकता है।
रेकी कैसे कार्य करती है?
यह शरीर के रोगग्रस्त भाग की दूषित ऊर्जा को हटाकर उस क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करती है। यह व्यक्ति के तरंग स्तर को बढ़ाती है। उसके प्रभा पंडल को स्वच्छ करती है जिसमें नकारात्मक विचार और रोग रहते है। इस क्रिया में यह शरीर के ऊर्जा प्रवाहों को सुचारु करने के साथ-साथ उन्हें बढ़ाती भी है। इस तरह यह रोग का उपचार करती है।
हमारा देश आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्ना देश है। हजारों वर्ष पूर्व भारत में स्पर्श चिकित्सा का ज्ञान था। अथर्ववेद में इसके प्रमाण पाए गए हैं, किंतु गुरु-शिष्य परंपरा के कारण यह विद्या मौखिक रूप से ही रही। लिखित में यह विद्या न होने से धीरे-धीरे इस विद्या का लोप होता चला गया। 2500 वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने ये विद्या अपने शिष्यों को सिखाई ताकि देशाटन के समय जंगलों में घूमते हुए उन्हें चिकित्सा सुविधा का अभाव न हो और वे अपना उपचार कर सकें। भगवान बुद्ध की 'कमल सूत्र' नामक किताब में इसका कुछ वर्णन है।
19वीं शताब्दी में जापान के डॉ. मिकाओ उसुई ने इस विद्या की पुनः खोज की और आज यह विद्या रेकी के रूप में पूरे विश्र्व में फैल गई है। डॉ. मिकाओ उसुई की इस चमत्कारिक खोज ने 'स्पर्श चिकित्सा' के रूप में संपूर्ण विश्व को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान की है।
रेकी सीखने के लाभ
1. यह शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्तरों को प्रभावित करती है।
2. शरीर की अवरुद्ध ऊर्जा को सुचारुता प्रदान करती है।
3. शरीर में व्याप्त नकारात्मक प्रवाह को दूर करती है।
4. अतीद्रिंय मानसिक शक्तियों को बढ़ाती है।
5. शरीर की रोगों से लड़ने वाली शक्ति को प्रभावी बनाती है।
6. ध्यान लगाने के लिए सहायक होती है।
7. समक्ष एवं परोक्ष उपचार करती है।
8. सजीव एवं निर्जीव सभी का उपचार करती है।
9. रोग का समूल उपचार करती है।
10. पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करती है।
रेकी की पात्रता
कोई भी व्यक्ति रेकी सीख सकता है। यह व्यक्ति के बौद्धिक, शैक्षणिक या आध्यात्मिक स्तर पर निर्भर नहीं है, न ही इसे सीखने के लिए उम्र का बंधन है। कोई भी व्यक्ति इसे सीख सकता है। इसे सीखने के लिए वर्षों का अभ्यास नहीं चाहिए न ही रेकी उपचारक की व्यक्तिगत स्थिति के कारण उपचार पर कोई प्रभाव पड़ता है। यह क्षमता रेकी प्रशिक्षक के द्वारा उसके प्रशिक्षार्थी में सुसंगतता (एट्यूनमेंट) के माध्यम से उपलब्ध होती है, इसके प्राप्त होते ही व्यक्ति के दोनों हाथों से ऊर्जा का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है और इस तरह वह स्वयं का तथा दूसरों का भी उपचार कर सकता है।
रेकी कैसे कार्य करती है?
यह शरीर के रोगग्रस्त भाग की दूषित ऊर्जा को हटाकर उस क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करती है। यह व्यक्ति के तरंग स्तर को बढ़ाती है। उसके प्रभा पंडल को स्वच्छ करती है जिसमें नकारात्मक विचार और रोग रहते है। इस क्रिया में यह शरीर के ऊर्जा प्रवाहों को सुचारु करने के साथ-साथ उन्हें बढ़ाती भी है। इस तरह यह रोग का उपचार करती है।
हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का चमत्कार
Hanumaan Chalisa Evam Bajarang Baan kaa Chamatkar
आज हर व्यक्ति अपने जीवन मे सभी भौतिक सुख साधनो की प्राप्ति के लिये भौतिकता की दौड मे भागते हुए किसी न किसी समस्या से ग्रस्त है। एवं व्यक्ति उस समस्या से ग्रस्त होकर जीवन में हताशा और निराशा में बंध जाता है। व्यक्ति उस समस्या से अति सरलता एवं सहजता से मुक्ति तो चाहता है पर यह सब केसे होगा? उस की उचित जानकारी के अभाव में मुक्त हो नहीं पाते। और उसे अपने जीवन में आगे गतिशील होने के लिए मार्ग प्राप्त नहीं होता। एसे मे सभी प्रकार के दुख एवं कष्टों को दूर करने के लिये अचुक और उत्तम उपाय है हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण ही क्यु ?
क्योकि वर्तमान युग में श्री हनुमानजी शिवजी के एक एसे अवतार है जो अति शीघ्र प्रसन्न होते है जो अपने भक्तो के समस्त दुखो को हरने मे समर्थ है। श्री हनुमानजी का नाम स्मरण करने मात्र से ही भक्तो के सारे संकट दूर हो जाते हैं। क्योकि इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इसी कारण श्री हनुमानजी जन साधारण मे अत्यंत लोकप्रिय है। इनके मंदिर देश-विदेश सवत्र स्थित हैं। अतः भक्तों को पहुंचने में अत्याधिक कठिनाई भी नहीं आती है। हनुमानजी को प्रसन्न करना अति सरल है
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के माध्यम से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा अर्चना से अपनी दैनिक दिनचर्या से थोडा सा समय निकाल ले तो उसकी समस्त परेशानी से मुक्ति मिल जाती है।
“यह नातो सुनि सुनाइ बात है ना किसी किताब मे लिखी बात है, यह स्वयं हमारा निजी एवं हमारे साथ जुडे लोगो के अनुभत है।”
उपयोगी जानकारी
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के नियमित पाठ से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए प्रस्तुत हैं कुछ उपयोगी जानकारी ..
• नियमित रोज सुभह स्नान आदिसे निवृत होकर स्वच्छ कपडे पहन कर ही पाठ का प्रारम्भ करे।
• नियमित पाठ में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है।
• हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ करते समय धूप-दीप अवश्य लगाये इस्से चमत्कारी एवं शीघ्र प्रभाव प्राप्त होता है।
• दीप संभव न होतो केवल ३ अगरबत्ती जलाकर ही पाठ करे।
• कुछ विद्वानो के मत से बिना धूप से हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ प्रभाव हिन होता है।
• यदि संभव हो तो प्रसाद केवल शुद्ध घी का चढाए अन्य था न चढाए
• जहा तक संभव हो हनुमान जी का सिर्फ़ चित्र (फोटो) रखे ।
• यदि घर मे अलग से पूजा घर की व्यवस्था हो तो वास्तुशास्त्र के हिसाब से मूर्ति रखना शुभ होगा। नही तो हनुमान जी का सिर्फ़ चित्र (फोटो) रखे।
• नियमित पाठ पूर्ण आस्था, श्रद्धा और सेवा भाव से की जानी चाहिए। उसमे किसी भी तरह की संका या संदेह न रखे।
• सिर्फ़ देव शक्ति की आजमाइस के लिये यह पाठ न करे।
• या किसी को हानि, नुक्सान या कष्ट देने के उद्देश्य से कोइ पूजा पाठ नकरे।
• एसा करने पर देव शक्ति या इश्वरीय शक्ति बुरा प्रभाव डालती है या अपना कोइ प्रभाग नहि दिखाती! एसा हमने प्रत्यक्ष देखा है।
• एसा प्रयोग करने वालो से हमार विनम्र अनुरोध है कृप्या यह पाठ नकरे।
• समस्त देव शक्ति या इश्वरीय शक्ति का प्रयोग केवल शुभ कार्य उद्देश्य की पूर्ति के लिये या जन कल्याण हेतु करे।
• ज्यादातर देखा गया है की १ से अधिक बार पाठ करने के उद्देश्य से समय के अभाव मे जल्द से जल्द पाठ कने मे लोग गलत उच्चारण करते है। जो अन उचित है।
• समय के अभाव हो तो ज्यादा पाठ करने कि अपेक्षा एक ही पठ करे पर पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा से करे।
• पाठ से ग्रहों का अशुभत्व पूर्ण रूप से शांत हो जाता है।
• यदि जीवन मे परेशानीयां और शत्रु घेरे हुए है एवं आगे कोइ रास्ता या उपाय नहीं सुझ रहा तो डरे नही नियमित पाठ करे आपके सारे दुख-परेशानीयां दूर होजायेगी अपनी आस्था एवं विश्वास बनाये रखे।
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण
Thursday, June 2, 2011
गीत
गीत
हिमत का है खेल खिलाडी और मन में आशा
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा -2
तुफानो से लड़ता जा तू हिमत से काम ले
आशा तेरी पूरी होगी इतना तू जान ले
देख के तुझ को भागे दूर निराशा -२
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा
हिमत का है खेल खिलाडी और मन में आशा
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा
सूरज बनके तू रोशन जहान दे
अपने होसलो से लम्बी उडान ले
देख फिर जीवन में आती है नयी आशा -2
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा
हिमत का खेल खिलाडी और मन में आशा
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा
सपनो को पूरा करके लेनी है सांस रे
मन में इस चाहत को तू थान ले
हर मुश्किल में साथ रहेगी ये आशा
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा -२
हिमत का है खेल खिलाडी और मन में आशा
कभी तो पूरी होगी तेरे जीवन की आशा
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