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GURUTVA JYOTISH
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Monthly Astrology Magazines
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Wednesday, September 28, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर- 2011 में प्रकशित लेख


Oct 2011 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost. गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, रत्न, मंत्र, यंत्र, तंत्र, कवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।
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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर- 2011 में प्रकशित लेख
आद्य शक्ति विशेष


अनुक्रम
नवरात्र विशेष
नवरात्र में मां दुर्गा के नवरुपों कि उपासना कल्याणकारी हैं
6
मां दुर्गा की उपासना क्यों की जाती हैं?
7
शारदीय नवरात्र व्रत से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं
8
कैसे करें नवरात्र व्रत?
9
देवी आराधना से अभिष्ट कार्यो की सिद्धि हेतु
11
आश्विन नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त, विधि-विधान
12
सरल विधि-विधान से शारदीय नवरात्र व्रत उपासना
13
नवरात्र स्पेशल घट स्थापना विधि
14
नवार्ण मंत्र से होती हैं नवग्रह शांति
18
दुर्गाष्टाक्षर मन्त्र साधना
22
कुमारी पूजन से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
23
माता के 52 शक्ति पीठ
26
नवार्ण मन्त्र साधना
20
दीपावली विशेष
धन तेरस शुभ मुहूर्त (24 अक्तूबर, 2011)
47
दीपावली पूजन मुहूर्त (26-अक्तूबर-2011)
48
लक्ष्मी प्राप्ति हेतु करें राशि मंत्र का जप
53
लक्ष्मी प्राप्ति के सरल उपाय 
54
लक्ष्मी मंत्र
56
दीप जलाने का महत्व क्या हैं?
63
धनत्रयोदशी पर यम-दीपदान अकालमृत्यु को दूर करता हैं
66
धनत्रयोदशी पर यमदीपदान क्यों किया जाता हैं?
68
दीपावली के दिन कैसे करें बहीखाता तुला पूजन?
69
दीपावली का महत्व और लक्ष्मी पूजन विधि
70
श्री धनवंतरि व्रत कथा
71
सप्त श्री का चमत्कार
74
स्फटिक श्रीयंत्र का पूजन
75
मंत्र एवं स्तोत्र
दुर्गा चालीसा
32
श्रीकृष्ण कृत देवी स्तुति,
33
ऋग्वेदोक्त देवी सूक्तम्,
33
सप्‍तश्र्लोकी दुर्गा,
34
दुर्गा आरती,
34
सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्‌,
35
भवान्यष्टकम्‌,
36
क्षमा-प्रार्थना,
36
दुर्गाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्,
37
विश्वंभरी स्तुति,
38
महिषासुरमर्दिनिस्तोत्रम्,
39
गुप्त सप्तशती,
41
दुर्गाष्टकम्‌,
35
सर्व ऐश्वर्य प्रद-लक्ष्मी-कवच
77
महालक्ष्मी कवच
78
महालक्ष्मी स्तुति
79
श्री कनकधारा स्तोत्र
80
श्री लक्ष्मी चालीसा
81
श्री सूक्त
82
धनलक्ष्मी स्तोत्र
82
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
83
देवकृत लक्ष्मी स्तोत्रम्
83
हमारे उत्पाद
दुर्गा बीसा यंत्र
6
मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि
10
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
10
गणेश लक्ष्मी यंत्र
13
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
17
द्वादश महा यंत्र
21
शादी संबंधित समस्या
37
मंत्र सिद्ध गणेश यंत्र
49
मंगल यंत्र से ऋण मुक्ति
50
मंत्र सिद्ध दुर्लभ सामग्री
55
सर्व कार्य सिद्धि कवच
57
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्रो सूची
58
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
59
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
60
राशी रत्न एवं उपरत्न 
60
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र/ कवच
61
राम रक्षा यंत्र
62
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
65
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
67
लक्ष्मी यंत्र
74
कनकधारा यंत्र
80
राशि रत्न
88
मंत्र सिद्ध सामग्री
94
सर्व रोगनाशक यंत्र/
101
मंत्र सिद्ध कवच
103
YANTRA
104
GEMS STONE
106
स्थायी लेख
संपादकीय
4
पति-पत्नी में कलह निवारण हेतु
22
शरद पूर्णिमा (11-अक्टूबर-2011)
44
कोजागरी पूर्णिमा (11-अक्टूबर-2011)
45
दुर्वा पूजनमें रखे सावधानियां
45
करवा चौथ व्रत (15-अक्टूबर-2011)
46
नये कपडे और ज्योतिष
50
मासिक राशि फल
84
अक्टूबर 2011 मासिक पंचांग
89
अक्टूबर-2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
 91
अक्टूबर 2011 -विशेष योग
 97
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
97
दिन-रात के चौघडिये
98
दिन-रात कि होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक
99
ग्रह चलन अक्टूबर -2011
100
सूचना
108
हमारा उद्देश्य
110

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Saturday, September 24, 2011

नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त, (28 सितम्बर 2011)

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आश्विन शुक्ल प्रतिपदा अर्थात नवरात्री का पहला दिन। इसी दिन से ही आश्विनी नवरात्र का प्रारंभ होता हैं। जो अश्विन शुक्ल नवमी को समाप्त होते हैं, इन नौ दिनों देवि दुर्गा की विशेष आराधना करने का विधान हमारे शास्त्रो में बताया गया हैं। परंतु इस वर्ष तृतिया तिथी का क्षय होने के कारण नवरात्र नौ दिन की जगह आठ दिनो के होंगे। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH,
पारंपरिक पद्धति के अनुशास नवरात्रि के पहले दिन घट अर्थात कलश की स्थापना करने का विधान हैं। इस कलश में ज्वारे(अर्थात जौ और गेहूं ) बोया जाता है। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 

घट स्थापनकी शास्त्रोक्त विधि इस प्रकार हैं।  GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 
घट स्थापना आश्विन प्रतिपदा के दिन कि जाती हैं।
घट स्थापना हेतु चित्रा नक्षत्र और वैधृतियोग को वर्जित माना गया हैं। (चित्रा नक्षत्र 28 सितंबर 2011 को दोपहर 01:37:33 बजे से लग रहा हैं।) घट स्थापना में चित्रा नक्षत्र को निषेध माना गया हैं। अतः घट स्थापना इससे पूर्व करना शुभ होता हैं।
विद्वनो के मत से इस वर्ष शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में सूर्योदयी नक्षत्र हस्त नक्षत्र रहेगा। हस्त नक्षत्र को पूजन हेतु उत्तम माना जाता हैं। हैं। इस लिये सूर्योदय से 6.12 बजे के बाद से ही कलश (घट) की स्थापना करना शुभदायक रहेगा।

यदि ऎसे योग बन रहे हो, तो घट स्थापना दोपहर में अभिजित मुहूर्त या अन्य शुभ मुहूर्त में करना उत्तम रहता हैं। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 

कलश स्थापना हेतु शुभ मुहूर्त
  • लाभ मुहूर्त सुबह 06:12 से 07:42 तक
  • अमृत मुहूर्त सुबह 07:42 से 09:12 तक
  • शुभ मुहूर्त सुबह 10:42 से 12:12 तक
  • के मुहूर्त घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेंगे। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 

घट स्थापना हेतु सर्वप्रथम स्नान इत्यादि के पश्चयात गाय के गोबर से पूजा स्थल का लेपन करना चाहिए। घट स्थापना हेतु शुद्ध मिट्टी से वेदी का निर्माण करना चाहिए, फिर उसमें जौ और गेहूं बोएं तथा उस पर अपनी इच्छा के अनुसार मिट्टी, तांबे, चांदी या सोने का कलश स्थापित करना चाहिए। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 
यदि पूर्ण विधि-विधान से घट स्थापना करना हो तो पंचांग पूजन (अर्थात गणेश-अंबिका, वरुण, षोडशमातृका, सप्तघृतमातृका, नवग्रह आदि देवों का पूजन) तथा पुण्याहवाचन (मंत्रोंच्चार) विद्वान ब्राह्मण द्वारा कराएं अथवा अमर्थता हो, तो स्वयं करें।
पश्चयात देवी की मूर्ति स्थापित करें तथा देवी प्रतिमाका षोडशोपचारपूर्वक पूजन करें। इसके बाद श्रीदुर्गासप्तशती का संपुट अथवा साधारण पाठ करना चाहिए। पाठ की पूर्णाहुति के दिन दशांश हवन अथवा दशांश पाठ करना चाहिए। GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 
घट स्थापना के साथ दीपक की स्थापना भी की जाती है। पूजा के समय घी का दीपक जलाएं तथा उसका गंध, चावल, व पुष्प से पूजन करना चाहिए।
पूजन के समय इस मंत्र का जप करें- GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH, 
भो दीप ब्रह्मरूपस्त्वं ह्यन्धकारनिवारक।
इमां मया कृतां पूजां गृह्णंस्तेज: प्रवर्धय।।


कलश स्थापना की संपूर्ण-विधि गुरुत्व ज्योतिष मासिक पत्रिका के अक्टूबर-2011 के अंक में उप्लब्ध हैं।

Thursday, September 1, 2011

गणेश पूजन हेतु शुभ मुहूर्त


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लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (सितम्बर-2011)
वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार ब्रह्मांड में समय अनंत आकाश के अतिरिक्त समस्त वस्तुएं मर्यादा युक्त हैं। जिस प्रकार समय का ही कोई प्रारंभ है ही कोई अंत है। अनंत आकाश की भी समय की तरह कोई मर्यादा नहीं है। इसका कहीं भी प्रारंभ या अंत नहींहोता। आधुनिक मानव ने इन दोनों तत्वों को हमेशा समझने का अपने अनुसार इनमें भ्रमण करने का प्रयास किया हैं परन्तु उसे सफलता प्राप्त नहीं  हुई है।
सामान्यतः मुहूर्त का अर्थ है किसी भी कार्य को करने के लिए सबसे शुभ समय तिथि चयन करना। कार्य पूर्णतः फलदायक हो इसके लि, समस्त ग्रहों अन्य ज्योतिष तत्वों का तेज इस प्रकार केन्द्रित किया जाता है कि वे दुष्प्रभावों को विफल कर देते हैं। वे मनुष्य की जन्म कुण्डली की समस्त बाधाओं को हटाने में दुर्योगो को दबाने या घटाने में सहायक होते हैं।
शुभ मुहूर्त ग्रहो का ऎसा अनूठा संगम है कि वह कार्य करने वाले व्यक्ति को पूर्णतः सफलता की ओर अग्रस्त कर देता है।
हिन्दू धर्म में शुभ कार्य केवल शुभ मुहूर्त देखकर किए जाने का विधान हैं। इसी विधान के अनुसार श्रीगणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्रीगणेश की स्थापना के श्रेष्ठ मुहूर्त आपकी अनुकूलता हेतु दर्शाने का प्रयास किया जा रहा हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर किए गए कार्य निश्चित शुभ सफलता देने वाले होते हैं।

श्रीगणेश चतुर्थी के लिये (1 सितंबर 2011 गुरुवार)
प्रातः  6:20 से 7:50 तक  शुभ
मध्याह्नः  12:20 से 1:30 तक लाभ
संध्याः  4:50 से 6:20 तक शुभ
अन्य शुभ समय
वृश्चिक लग्न में (दोपहर 11:44 से दोपहर 1:30 तक ) तथा कुंभ लग्न में (संध्या 5:52 से संध्या 7: 03 तक) भगवान श्रीगणेश प्रतिमा की स्थापना की जा सकती हैं।
क्योंकि ज्योतिष के अनुशार वृश्चिक और कुंभ दोनों स्थिर लग्न हैं। स्थिर लग्न में किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थाई होता हैं।
विद्वानो के मतानुशार शुभ प्रारंभ यानि आधा कार्य स्वतः पूर्ण।

Monday, August 15, 2011

Tuesday, August 9, 2011

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