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Monday, October 29, 2018

GURUTVA JYOTISH Weekly E-MAGAZINE 28 October 2018 By GURUTVA KARYALAY

GURUTVA JYOTISH Weekly E-MAGAZINE 28 October 2018 TO 3 November 2018 गुरुत्व ज्योतिष साप्ताहिक ई-पत्रिका 28-3 नवम्बर 2018 में प्रकाशित लेख
October-2018 Free Weekly Hindi Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost.
गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका 28 अक्टूबर से 3 नवम्बर 2018में प्रकशित लेख
साप्ताहिक ई-पत्रिका

GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE 28-OCT to 3-NOV 2018
Weekly
अनुक्रम
इस अंक में पढे़
अहोई अष्टमी (31 अक्टूबर 2018)
6
रमा एकादशी (रम्भा एकादशी) व्रत कथा
7
वास्तु के अनुसार मानसिक अशांति निवारण उपाय
10
ज्योतिष के अनुशार किस नक्षत्रों में धारण करें कपडे ?
12
अंग फड़कने से शुकन अपशुकन
14
मनोवांछित फलो कि प्राप्ति हेतु सिद्धि प्रद गणपति स्तोत्र
15
रत्नों का अद्भुत रहस्य (मोती )
16
प्रकृति की अलौकिक देन रुद्राक्ष
19
वर्णमाला के अनुसार स्वप्न फल विचार
21
अंक ज्योतिष का रहस्य (मूलांक 2)
24
स्थायी और अन्य लेख
संपादकीय
4
28 अक्टूबर से 3 नवम्बर 2018 साप्ताहिक पंचांग
40
28 अक्टूबर से 3 नवम्बर 2018 साप्ताहिक व्रत-पर्व-त्यौहार
40
कार्य सिद्धि योग
46
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
46
दिन के चौघडिये
47
दिन कि होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक
48

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Friday, August 1, 2014

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व (1 अगस्त 2014) Nag Panchami Ka Dharmik Mahatva

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नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (अगस्त-2014)

नाग पंचमी व्रत श्रावण शुक्ल पंचमीको किया जाता है । लेकिन लोकाचार व संस्कृति- भेद के कारण नाग पंचमी व्रत को किसी जगह कृष्णपक्षमें भी किया जाता है । इसमे परविद्धा युक्त पंचमी ली जाती है । पौराणिक मान्यता के अनुशार इस दिन नाग-सर्प को दूधसे स्त्रान और पूजन कर दूध पिलाने से व्रती को पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं। अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबरके सर्प बनाकर उनका दही, दूर्वा, कुशा, गन्ध, अक्षत, पुष्प, मोदक और मालपुआ इत्यादिसे पूजन कर ब्राह्मणोंको भोजन कराकर एकभुक्त व्रत करनेसे घरमें सर्पोंका भय नहीं होता है । 
सर्पविष दूर करने हेतु निम्न निम्नलिखित मंत्र का जप करने का विधान हैं। 
"ॐ कुरुकुल्ये हुं फद स्वाहा।"

नाग पंचमी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुशार प्राचीन काल में किसी नगर के एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों पुत्रों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदुषी और सुशील थी, लेकिन उसका कोई भाई नहीं था।

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने के लिए पीली मिट्टी लाने हेतु सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी बहू उस के साथ मिट्टी खोदने के औजार लेकर चली गई और किसी स्थान पर मिट्टी खोदने लगी, तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी। यह देखकर छोटी बहू ने बड़ी बहू को रोकते हुए कहा  "मत मारो इस सर्प को? यह बेचारा निरपराध है।"

छोटी बहू के कहने पर बड़ी बहू ने सर्प को नहीं मारा और सर्प एक ओर जाकर बैठ गया। तब छोटी बहू ने सर्प से कहा "हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से कहीं जाना मत" इतना कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और घर के कामकाज में फँसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई।

उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब बहूओं को साथ लेकर वहाँ पहुँची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली "सर्प भैया नमस्कार!" सर्प ने कहा तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठे वादे करने के कारण तुझे अभी डस लेता। छोटी बहू बोली भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा माँगती हूं, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहिन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो मांगना हो, माँग ले। वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया।

कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप धरकर उसके घर आया और बोला कि "मेरी बहिन को बुला दो, मैं उसे लेने आया हूँ" सबने कहा कि इसके तो कोई भाई नहीं था! तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूँ, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि "मैं वहीं सर्प हूँ, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरा हाथ पकड़ लेना। उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई। वहाँ के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई।

वह सर्प परिवार अके साथ आनंद से रहने लगी। एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा "मैं एक काम से बाहर जा रही हूँ, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात ध्यान न रही और उससे गलति से गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुहँ बुरी तरह जल गया। यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई। परंतु सर्प के समझाने पर माँ चुप हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए। तब सर्प और उसके पिता ने उसे भेट स्वरुप बहुत सा सोना, चाँदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुँचा दिया।

साथ लाया ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा से कहा तुम्हारां भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए। सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएँ सोने की लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू की लालच बढ़ गई उसने फिर कहा "इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए" तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी।

सर्प ने अपने बहिन को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि "सेठ की छोटी बहू का हार यहाँ आना चाहिए।" राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि "महारानीजी ने छोटी बहू का हार मंगवाया हैं, तो वह हार अपनी बहू से लेकर मुझे दे दो"। सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर दे दिया।

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने मेरा हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब वह पुनः हीरों और मणियों का हो जाए। सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया। यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी।

यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो। सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए। राजा ने छोटी बहू से पूछा "तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दण्ड दूंगा।" छोटी बहू बोली "राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए" यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है। यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया।

यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे भेट में बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं। छोटी वह अपने हार और भेट सहित घर लौट आई। उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा सच-सच बताना कि यह "धन तुझे कौन देता है?" तब वह सर्प को याद करने लगी।

तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा यदि मेरी धर्म बहिन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे डंस लूँगा। यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया। मान्यता हैं की उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियाँ सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

Monday, October 15, 2012

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर-2012 में प्रकशित लेख


October-2012 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost.  

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर-2012 में प्रकशित लेख
नवरात्र विशेष विशेष
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अनुक्रम
नवरात्र विशेष में पढे़
मां दुर्गा की उपासना क्यों की जाती हैं?
6
प्रथम शैलपुत्री
7
द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
8
तृतीयं चन्द्रघण्टा
9
चतुर्थ कूष्माण्डा
10
पंचम स्कंदमाता
11
षष्ठम् कात्यायनी
12
सप्तम कालरात्रि
13
अष्टम महागौरी
14
नवम् सिद्धिदात्री
15
शारदीय नवरात्र व्रत से सुख-समृद्धि दायक हैं
16
नवरात्र व्रत की सरल विधि?
17
देवी कृपा से मनोवांच्छित कार्यो सिद्धि
18
सरल विधि-विधान से शारदीय नवरात्र व्रत
19
आश्विन नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त
20
नवरात्र स्पेशल घट स्थापना विधि
22
नवार्ण मंत्र द्वारा नवग्रह कष्ट निवारण
26
कामनापूर्ति हेतु नवार्ण मंत्र साधना
28
पति-पत्नी में कलह निवारण हेतु
30
कुमारी पूजन से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
31
माँ दुर्गा के चमत्कारी मन्त्र
46
नवरात्र में लाभदायक कन्या पूजन
49
मां के चरणों निवास करते समस्त हैं तीर्थ
54
पंच देवोपासना में उपयुक्त एवं निषिद्ध पत्र पुष्प
55
हमारे उत्पाद
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
18
दुर्गा बीसा यंत्र
21
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
29
सर्व कार्य सिद्धि कवच
63
सर्वसिद्धिदायक मुद्रिका
64
द्वादश महा यंत्र
65
शनि पीड़ा निवारक 
68
श्री हनुमान यंत्र
70
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
71
मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि
71
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
73
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र / कवच
74
राम रक्षा यंत्र
75
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्र
76
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
77
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
78
राशी रत्न एवं उपरत्न 
78
सर्व रोगनाशक यंत्र/
95
मंत्र सिद्ध कवच
97
YANTRA LIST
98
GEM STONE
100
स्थायी लेख
संपादकीय
4
मासिक राशि फल
79
सितम्बर 2012 मासिक पंचांग
83
सितम्बर-2012 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
85
सितम्बर 2012 -विशेष योग
91
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
91
दिन-रात के चौघडिये
92
दिन-रात कि होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक
93
ग्रह चलन सितम्बर -2012
94
सूचना
102
हमारा उद्देश्य
104

GURUTVAJYOTISH E-MAGAZINE OCT-2012
OCT-2012

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