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Monday, April 18, 2011

फल एक फायदे अनेक भाग:5 (आंवला-Myrobalan)

One Fruit multiple benefits Part: 5 (Myrobalan) ,

आंवले में सारे रोग दूर करने के गुण व शक्ति होती है। आंवला युवकों को भी यौवन शक्ति प्रदान करता है तथा बूढ़ों को युवा जैसी शक्ति देता है। बशर्ते आंवला किसी न किसी रूप में रोज सेवन करें। आंवले में विटामिन सी भरपूर होता है।
हर इंसान को प्रतिदिन 50 मिली ग्राम विटामिन सी की जरूरत होती है। एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है। आंवले का मुरब्बा ताकत देने वाला होता है।

गर्भवती स्त्रियों को आंवला अवश्य लेना चाहिये। किसी भी रूप में लें।

आंवला एक अंण्डे से अधिक बल देता है।

आंवला ब्लडप्रेशर वालों के लिये लाभप्रद है।

आंवला टूटी हड्डियों को जोड़ने वाला है।

जिन्हें नकसीर होता हो (नाक से खून) सूखा आंवला रात में भिगाकर उस पानी से सर धोयें। आंवले का मुरब्बा खायें। आंवले का रस नाक में टपकायें।

आंवले का चूर्ण मूली में भरकर खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है।

आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से मधुमेह में लाभ होता है।

रात के आंवले का चूर्ण भीगो कर पानी पीये सुबह पेट साफ होता है। पाचन शक्ति बढ़ती है।

नित्य 1-2 ताजे आंवले का रस पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। पांच दिन तक बराबर पियें।

जो लोग स्वस्थ रहना चाहते हैं वो ताजा आंवला का रस शहद में मिलाकर पीने के बाद ऊपर से दूध पियें इससे स्वास्थ अच्छा रहता है। दिन भर प्रसन्नता का अनुभव होता है। नई शक्ति व चेतना देता है। यौवन बहार आयेगा।

आंवले का रस पीने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।

गर्भावस्था में उल्टी हो रही हो, तो आंवले का मुरब्बा खायें।

आंवले के चूर्ण का उबटन चेहरे पर लगाये चेहरा साफ होगा दाग धब्बे दूर होंगे।

गर्मियों में चक्कर आता हो जी घबराता हो तो आंवले का शर्बत पियें।

आवाज बैठ गई हो, तो पिसे आंवले की फंली लें।

आंवले में बाल करने के गुण है। आंवला बहुत खट्टा इसलिये सफाई अच्छी करता है बालों की। साथ रोज आंवले का सेवन करें।

बुढ़ापा दूर रखता है। सूखे आंवले का चूर्ण 2 चम्मच रोज रोटी में रखकर खायें। बुढ़ापा दूर रहेगा जवानी बनी रहेगी।

Friday, April 15, 2011

गरमी में अपनाये ब्युटी टिप्स

गरमी में अपनाये ब्युटी टिप्स गर्मी के मौसम की शुरूआत हो चुकी है और अभी से ही तेज धूप ने परेशान करना शुरू कर दिया है।

गर्मी में सबसे ज्यादा त्वचा को नुकसान पहुंचता है क्योंकि तेज धूप सीधे त्वचा पर इफेक्ट डालती है। ऎसे में जरूरी है कि गर्मी की शुरूआत में ही प्रिकॉशन लेना शुरू कर दिया जाए ताकि बाद में होने वाली विभिन्न त्वचा संबंधी विभिन्न बीमारियों से बचा जा सके।

कुछ काम की बातें धूप में निकलते समय स्कार्फ व ग्लव्ज का प्रयोग जरूर करें। गर्मी में जहां तक हो सके कॉटन ड्रेसेस पहनें।

फेस या हाथ पैरों पर यदि दाने या लाल चकते हो जाएं तो बर्फ रगड़ें। कोशिश करें कि सुबह व शाम के समय किसी भी काम के लिए निकलें, दिन के समय सन स्क्रीन क्रीम लगाकर बाहर जाएं। सोने से पूर्व हाथ पैरों पर क्रीम लगाकर सोएं।

आंखों का विशेष्ा खयाल रखें और धूप के चश्मे का प्रयोग करें। घरेलू नुस्खे अपनाएं गर्मी में धूप से बचने के लिए घरेलू उपाय भी बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं।

मुल्तानी मिट्टी, तुलसी, चंदन, गुलाब आदि प्राकृतिक चीजें गर्मी में काफी राहत पहुंचाती हैं।

गर्मी से त्वचा झुलसने पर मुल्तानी मिट्टी व चंदन पाउडर लगाने से काफी फायदा होता है।

इसके अलावा घमोरियां होने पर नीम व तुलसी की पत्तियों का पेस्ट लगाना लाभकारी रहता है।

वहीं गुलाब की पत्तियों को पानी में भिगोकर उस पानी से चेहरा धोने से गर्मी का असर कम होता है।

गर्मी में डेंड्रफ की समस्या भी बढ़ जाती है ऎसे में काली मिट्टी को रात में पानी में गलाकर सुबह उसे बालों में लगाने से काफी फायदा होता है।

झुल्सा देने वाली गर्मी में करे यह उपाय

गर्मियों के दौरान सफेद चंदन या चंदन चूर्ण को पानी में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एंटी बैक्टीरियल होता है जिससे त्वचा साफ-स्वच्छ और शीतल बनती है।


इसी तरह नीम, तुलसी, गुलाब की पंखुड़ियों और चंदन (बराबर मात्रा में) में कच्चा दूध मिलाकर तैयार लेप का प्रयोग करने से त्वचा में उजलापन आता है और मुँहासों से भी राहत मिलती है। इस लेप को कम से कम एक घंटे तक लगाए रखें और फिर पानी से धो दें।


इस उपचार से आपकी त्वचा मुलायम और नरम बनेगी। 10 ग्राम सूखे नीम के पत्तों और सात काली मिर्च का चूर्ण बनाकर मिलाएँ और इसमें पानी मिलाकर इसे छान लें। घर में तैयार इस टॉनिक के सेवन से त्वचा संबंधी कई विकारों से राहत मिलती है। एक सप्ताह तक इस नुस्खे को आजमाएँ और खुद ही फर्क देख लें।


गरमी के दिनों में चेहरे पर ताजगी लाने के लिए दो चम्मच बेसन, हल्दी पावडर, गुलाब जल व शहद मिलाकर लेप बनाएँ। इसे चेहरे व हाथ-पैरों और गर्दन पर लगाएँ व 10 मिनट बाद धो लें। इससे त्वचा सुंदर व स्वस्थ बनी रहेगी।


आँखों में जलन व काले घेरों को कम करने के लिए रात को सोते समय आँखों पर ठंडे दूध में रुई भिगोकर रखें। होठों को सुंदर और मुलायम बनाए रखने के लिए रात को सोते समय दूध की मलाई लगाएँ, सुबह ठंडे पानी से धो लें। कच्चे दूध में हल्दी डालकर पेस्ट बनाएँ। इसे चेहरे और हाथ-पैरों पर लगाएँ।


10 मिनट बाद धो लें। त्वचा निखर उठेगी। 8-10 दिन में एक बार चेहरे को भाप अवश्य दें। इस पानी में पुदीना, तुलसी की पत्ती, नीबू का रस व नमक डालें। भाप लेने के बाद इसी गुनगुने पानी में 5 मिनट के लिए हाथों को रखें। हाथ मुलायम हो जाएँगे।

Friday, April 8, 2011

फल एक फायदे अनेक भाग:4 (आंवला-Myrobalan)

One Fruit multiple benefits Part: 4 (Myrobalan) ,

Amala-Myrobalan
आंवला सालों भर मिलने वाला फल है. हिन्दु धर्म में आंवला के वृक्ष को देवताओं के समान पूजा जाता है. इसका वृक्ष जहां भी होता है वहां के आस-पास का वातावरण शुद्ध रहता है. आंवला हरे रंग का होता है. इसके अंदर एक बीज होता है. इसे खाने के बाद पानी पिएं तो पानी का स्वाद मीठा लगता है. भारत के अलावा भी आंवाला कई देशों में पाया जाता है.

आंवला में पाये जाने वाले तत्व आंवले को गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता हैं. आंवले का एक मुख्य गुण यह है कि आंवले को पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता. आंवले में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मिनरल्स और विटामिन बी एवं सी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. कैल्शियम एवं फास्फोरस का भी यह अच्छा स्रोत होता है. आंवले में कैरोटिन नामक प्रोटीन भी होता है जो बालों के लिए बहुत गुणकारी माना जाता है.

आंवला से बनने वाली चीजें भारतीय रसोई में आंवले का भरपूर उपयोग किया जाता रहा है. स्वाद मे कसैला और खट्टापन लिए ये आंवला कई तरह से खाने योग्य बनाया जाता है जैसे आंवले की चटनी, आंवले का मुरब्बा, सब्जी, अचार, आंवले का जूस, शर्बत भी बनाकर आप इसके गुणकारी तत्वों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

आंवले का औषधि रुप में उपयोग आंवला एक महत्वपूर्ण औषधि के रुप में भी जाना जाता है. आंवला का इस्तेमाल भारतीय आयुर्वेद और यूनानी पद्धति की प्रसिद्ध दवाइयों में होता रहा है. च्यवनप्राश, ब्राह्मी रसायन, धात्री रसायन, त्रिफला चूर्ण एवं रसायन, आमलकी रसायन भी आंवले से तैयार किया जाता है. आंवले से केश तेल भी बनता है.

बालों के लिए आंवला बालों में कैरोटिन नामक प्रोटीन पाया जाता है. स्वास्थ्य एवं सुन्दर बालों के लिए कैरोटिन आवश्यक तत्व है जो आंवले में पाया जाता है. बालों को पोषण देने के लिए आप आंवले का तेल लगा सकते हैं. सूखे हुए आंवले को मेंहदी के साथ फूलाकर बालों में लगाने से बाल काले, घने एवं मुलायम हो जाते हैं.

स्वास्थ्य के लिए आंवला आंवले को धात्री फल भी कहा जाता है. धात्री का अर्थ होता है पालन करने वाला. इसमें मौजूद गुणकारी तत्वों के कारण ही इसे यह नाम दिया गया है. इसके नियमित सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है. इससे पाचन तंत्र दुरूस्त रहता है. सर्दी, जुकाम, खांसी जल्दी प्रभावित नहीं कर पाती है. त्वचा सम्बन्धी रोग में भी आंवले का सेवन लाभदायी होता है. लम्बे समय तक जवां दिखने की चाहत है तो प्रतिदिन किसी न किसी रूप में आवंला खाना चाहिए.

Sunday, March 27, 2011

फल एक फायदे अनेक भाग:3 (केला-Banana)

One Fruit multiple benefits Part: 3 (Banana) ,


मूसा जाति के घासदार पौधे और उनके द्वारा उत्पादित फल को आम तौर पर केला कहा जाता है. मूल रूप से ये दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णदेशीय क्षेत्र के हैं और संभवतः पपुआ न्यू गिनी में इन्हें सबसे पहले उपजाया गया था. आज कम से कम 107 देशों में केलों की उपज होती है

केले के फल लटकते गुच्छों में ही बड़े होते है, जिनमें 20 फलों तक की एक पंक्ति होती है (जिसे हाथ भी कहा जाता है), और एक गुच्छे में 3-20 केलों की पंकती होती है.  केलों के लटकते हुए सम्पूर्ण समूह को गुच्छा कहा जाता है, या व्यावसायिक रूप से इसे "बनाना स्टेम" कहा जाता है, और इसका वजन 30-50 किलो होता है. एक फल औसतन 125 ग्राम का होता है, जिसमें लगभग 75% पानी और 25% सूखी सामग्री होती है. प्रत्येक फल (केला या 'उंगली' के रूप में ज्ञात) में एक सुरक्षात्मक बाहरी परत होती है (छिलका या त्वचा) जिसके भीतर एक मांसल खाद्य भाग होता है. केले को काट कर और सुखा कर चिप्स के रूप में भी खाया जाता है. सूखे हुए केले को पीस कर केले का आटा भी बनाया जाता है.


पकने के बाद केले कई आकारों और रंगों में परिवर्तित हो जाते हैं जैसे पीला, बैंगनी और लाल. वैसे तो कच्चे केले भी खाए जा सकते हैं, लेकिन कुछ किस्मों को आम तौर पर पहले पकाया जाता है. कृषिजोपजाति और परिपक्वता के आधार पर केले का स्वाद कड़वा या मीठा होता है, और उसकी बनावट कठोर से पिलपिला होती है. कच्चे या हरे केले और प्लानटेंस का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में एक घटक के रूप में किया जाता है,  केले का रस काफी चिपचिपा होता है और इसका इस्तेमाल व्यावहारिक तौर पर गोंद के रूप में किया जा सकता है. छद्मतना, फल के छिलके, या फल के मांस से इस गोंद को प्राप्त किया जा सकता है.


स्थानीय बिक्री के लिए अधिकांश उत्पादन हरे पकाऊ केले और प्लानटेन का होता है, चूंकि पके मीठे केले, बाज़ार तक लाए जाने में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. यहां तक कि उत्पादित देश में ही जब उन्हें स्थानांतरित किया जाता है तो उस क्रम में भी केलों को बहुत ज्यादा क्षति और नुकसान से गुज़रना पड़ता है

केले की कम से कम तीन सौ से अधिक किस्में पाई जाती हैं जो स्वाद में भी अंतर लिए होती हैं. केला तीन रुप में लगने वाला फल है जिसके फूल, पत्ते और तना सभी उपयोग में लाए जाते हैं. केले से स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जाते हैं केले के फूल एवं तना भी तरकारी(सब्जी) बनाने मे उपयोग किए जाते हैं.

केले के फ़ायदे
  • केले का व्यजन में उपयोग केले से विभिन्न तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं कच्चा केला एवं पका केला दोनो ही सब्जी में उपयोग किए जाते हैं
  • केले में टमाटर, जीरे, लाल मिर्च, नमक, का छोंक लगा कर स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जा सकती है.
  • केले की चटनी और इसके साथ ही केले के चिप्स भी बहुत चाव के साथ खाए जाते हैं.
  • केरल, बंगाल में केले के फूल को सूप और तरी में उपयोग किया जाता है.
  • केले से कई प्रकार की मिठाईयां बनाई जाती हैं
  • केले को पैन केक बनाने में इस्तेमाल किया जाता है
  • केले से आईसक्रीम बनाई जाती है.
  • केले को दूध में डाल कर बनाना शेक तैयार कर सकते हैं गर्मी के मौसम मे ठंडा बनाना शेक खूब पिया जाता है.
  • केले के पत्ते केले के पत्तों से भोजन पात्र का निर्माण किया जाता है दक्षिण भारत में केले के पत्तों से बनाई गई थाली का बहुत इस्तेमाल देखा जा सकता है वहां होने वाली शादियों या होटलों में अक्सर केले के पत्तों पर ही व्यंजन परोसे जाते हैं.
  • इसी तरह अनेक रीति रिवाज़ों में केले एवं केले के पत्तों का उपयोग किया जाता है जो शुद्धता का प्रतीक माना जाता है.
  • केला स्वास्थ्य वर्धक केला शक्तिवर्धक तत्वों प्रोटीन, विटामिन और खनिज पदार्थों से भरा है.
  • केला पाचन योग्य़ खाने में मधुर और शीतल तासीर का है यह कफ, पित्त, रक्तविकार तथा गर्मी के रोगों का दूर करने वाला है.
  • ऐसिडिटी को कम करता है अल्सर के दर्द में लाभकारी है
  • यह अतिसार और कब्ज़ दोनों में लाभकारी है
  • केला और दूध का मिश्रण शरीर और स्वास्थ्य के लिए उत्तम आहार है.
  • केले में कैल्शियम की मात्रा होने से यह हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए अच्छा माना जाता है।
  • जो लोग बहुत पतले दुबले होते हैं, उन्हें दो केले 250 ग्राम दूध के साथ नियमित सेवन करना चाहिए। इससे उनका स्वास्थ्य भी ठीक होता है और वजन भी बढ़ता है।
  • गैस्ट्रीक होने पर, अल्सर होने पर या मन्दाग्नि होने पर नियमित केले का सेवन करने से शरीर को फ़ायदा होता है।
  • केले में लौह तत्त्व की प्रचुर मात्रा होती है जो रक्त निर्माण में सहायक होती हैं।
  • जिन लोगों के शरीर में रक्त की कमी होती है उन्हें केला नियमित रूप से खाना चाहिए।
  • केला खून में वृद्धि करके शरीर की ताकत बढ़ाने में सहायक है।
  • यदि प्रतिदिन केला खाकर दूध पिया जाए, तो कुछ ही दिनों में व्यक्ति तंदुरूस्त हो जाता है।
  • भूखे पेट केला नहीं खाना चाहिये।
  • भोजन के बाद केला खाने से ताक़त देता है।
  • रात को केला खाने से गैस पैदा होती है।
  • केला सब तरह की सूजन में हितकारी है।
  • दो केले १५ग्राम शहद में मिलाकर खाने से ह्रदय के दर्द में लाभ होता है। गैस्ट्रिक
  • केले के तने का रस पिलाने से पेट में पहुँचा विष नष्ट हो जाता है।


    प्रतिदिन दो केले खाने से सभी प्रकार के विटामिनों की पूर्ति हो जाती है। सुबह दो केले खाकर गुनगुना दूध पिएँ, केला रोज खाने वाला व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है, चित्तीदार या धब्बेदार, पतले छिलके वाला केला खाना अधिक लाभदायक होता है।
  • भोजन के बाद यदि दो केले रोज खाए जाएँ तो ये भोजन भी पचाते हैं और बल बढ़ाते हैं, इससे पाचन शक्ति ठीक होती है।
  • एक गिलास दूध में एक चम्मच घी, एक चुटकी पिसी इलायची मिला लें, एक टुकड़ा केला खाएँ और साथ ही एक घूँट दूध पिएँ।
  • इस प्रकार दो केले नित्य खाने से शरीर सुडौल, मोटा होता है, बल वीर्य तथा शुक्राणु (स्पर्म) की वृद्धि होती है, दिमागी ताकत तथा कामशक्ति बढ़ती है, स्त्रियों का प्रदर रोग ठीक होता है।

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फल एक फायदे अनेक भाग:2 (अंगूर-Grape)

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अंगूर का फलों में बहुत महत्व है यह स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्टिक भी है.अंगूर रस से भरा खाने में कोमल एवं शीतलता प्रदान करने वाला होता है.अंगूर अपने रंग ,आकार तथा स्वाद में भिन्नता के फलस्वरूप अनेक किस्मों में पाया जाता है जैसे की काले अंगूर,हरा अंगूर ,लाल, बैगनी रंग के अंगूर, लम्बे अंगूर, छोटे अंगूर, इत्यादी.

किशमिश और मुनक्के जैसे मेवे अंगूर को सुखा कर बनाए जाते हैं.जिसमें बीज रहित अंगूर को सुखाकर किशमिश बनाई जाती है और काले अंगूरों को सुखाकर मुनक्का बनाया जाता है.इसके अलावा अंगूर से जैम,जैली,जूस,सिरका और वाइन भी बनाई जाती है.अंगूर स्वस्थ और रोगी दोनो के लिए ही पौष्टिक एवं शक्तिप्रद आहार है.

अंगूर के विभिन्न नाम अंगूर को अनेक नामों से संबोधित किया जाता है जैसे की अंगूर को संस्कृत में द्राक्षा,गोस्तनी, कशिषा,हारहूरा,बंगला में बेदाना,कटकी या मनेका,गुजराती में धराख,दशक,फारसी में अंगूर,मवेका,अरबी में एनवजबीब,इंग्लिश में ग्रेप या ग्रेप रैजिन्स तथा लैटिन में विटिस्‌ विनिफेरा नाम से जाना जाता है.

अंगूर पोषक तत्वों से भरपूर अंगूर में विभिन्न पौष्टिक तत्व मौजूद होते है इसमें विटामिन ए, बी और विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम तथा सोडियम क्लोरॉइड, पोटेशियम क्लोरॉइड, पोटेशियम सल्फेट, मैग्निशियम तथा एल्युमिन जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. अंगूर में पाई जाने वाली शर्करा पूरी तरह से ग्लूकोज से बनी होती है जो शरीर में पहुंचकर एनर्जी प्रदान करती है.

अंगूर के लाभ
  • अंगूर स्वास्थ के लिए गुणकारी फल है यह एक सुपाच्य फल है जो सभी के लिए पथ्य है अंगूर का सेवन करने से वात , कफ, पित्त और रक्तपित्त रोगों का नाश होता है.
  • रोजाना अंगूर का रस सेवन करने से पाचनशक्ति ठीक होती है, कब्ज दूर होती है. सिर दर्द, चक्कर आना, छाती के रोग, क्षय रोग आदी में यह बहुत उपयोगी है.
  • अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से बुद्धि का विकास होता है और दिमाग तेज होता है.
  • अंगूर हृदय की दुर्बलता को दूर करता है हृदय रोगी को नियमित अंगूर खाने चाहिएं. अंगूर के सेवन से फेफडों मे जमा कफ निकल जाता है,
  • इससे खाँसी में भी आराम आता है.
  • अंगूर् एक अच्छा रक्त शोधक व रक्त विकारों को दूर करने वाला फल है.
  • यह शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है जिससे सेहत और सौंर्दय में निखार आता है
  • अंगूर एक बलवर्घक एवं सौन्दर्यवर्घक फल है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है।
  • यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है।
  • बहुत से ऎसे रोग हैं जिसमें रोगी को कोई पदार्थ नहीं दिया जाता है। उसमें भी अंगूर फल दिया जा सकता है।
  • अंगूर आँखों के लिए हितकर होता है।
  • अंगूर वीर्यवर्घक, रक्त साफ करने वाला, रक्त बढाने वाला तथा तरावट देने वाला फल है।
  • अंगूर के सेवन से फेफडों मे जमा कफ निकल जाता है । 
  • अंगूर जी मिचलाना, घबराहट, चक्कर आने वाली बीमारियों में भी लाभदायक है।
  • श्वास रोग व वायु रोगों में भी अंगूर का प्रयोग हितकर है।
  • नकसीर एवं पेशाब में होने वाली रूकावट में भी हितकर है।
  • अंगूर का शरबत लो ""अमृत तुल्य"" है।
  • शरीर के किसी भी भाग से रक्त स्राव होने पर अंगूर के एक गिलास ज्यूस में दो चम्मच शहद घोलकर पिलाने पर रक्त की कमी को पूरा किया जा सकता  है।
  • अंगूर का गूदा " ग्लूकोज व शर्करा युक्त " होता है। विटामिन "ए" पर्याप्त मात्रा में होने से अंगूर का सेवन " भूख " बढाता है, पाचन शक्ति ठीक रखता है, आँखों, बालों एवं त्वचा को चमकदार बनाता है।
  • हार्ट-अटैक से बचने के लिए बैंगनी (काले) अंगूर का रस "एसप्रिन" की गोली के समान कारगर है। "एसप्रिन" खून के थक्के नहीं बनने देती है।
  • बैंगनी (काले) अंगूर के रस में " फलोवोनाइडस " नामक तत्व होता है और यह भी यही कार्य करता है।
  • पोटेशियम की कमी से बाल बहुत टूटते हैं। दाँत हिलने लगते हैं, त्वचा ढीली व निस्तेज हो जाती है, जोडों में दर्द व जकडन होने लगती है। इन सभी रोगों को अंगूर दूर रखता है।
  • अंगूर फोडे-फुन्सियों एवं मुहासों को सुखाने में सहायता करता है।
  • अंगूर के रस के गरारे करने से मुँह के घावों एवं छालों में राहत मिलती है।
  • एनीमिया में अंगूर से बढकर कोई दवा नहीं है।
  • उल्टी आने व जी मिचलाने पर अंगूर पर थोडा नमक व काली मिर्च डालकर सेवन करें।
  • पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगों दे तथा सुबह मसल कर निचोडें तथा इस रस में थोडी शक्कर मिलाकर पीना चाहिए।
  • गठिया रोग में अंगूर का सेवन करना चाहिए। इसका सेवन बहुत लाभप्रद है क्योंकि यह शरीर में से उन तत्वों को बाहर निकालता है जिसके कारण गठिया होता है।
  • अंगूर के सेवन से हडि्डयाँ मजबूत होती हैं।
  • अंगूर के पत्तों का रस पानी में उबालकर काले नमक मिलाकर पीने से गुर्दो के दर्द में भी बहुत लाभ होता है।
  • भोजन के आघा घंटे बाद अंगूर का रस पीने से खून बढता है और कुछ ही दिनों में पेट फूलना, बदहजमी आदि बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
  • अंगूर के रस की दो-तीन बूंद नाक में डालने से नकसीर बंद हो जाती है।

फल एक फायदे अनेक भाग:1 (संतरा-Santara, Orange)

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संतरा जिसे कुछ लोग नारंगी भी कहते हैं रस से भरपूर स्वादिष्ट लोकप्रिय फल है.संतरा स्वाद में खटटा-मीठा एवं मधुर होता है यह ठंडा ,शीतल, शक्तिवर्द्धक फल है संतरे का सेवन तन और मन को प्रसन्नता देने वाला है यह उपवास के समय भी फलाहार रुप में खाया जा सकता है.भारत में बड़े पैमाने पर संतरे की खेती कि जाती है और गर्मी के मौसम में इसकी खपत ज्यादा होती है.

संतरे के रासायनिक तत्व संतरे में विटामिन ए, बी ,और सी प्रचुर मात्रा मे होते हैं इसके अलावा इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट ,ग्लूकोज और मैग्नेशियम, सोडियम, लौह, पोटाशियम, फास्फोरस, कैल्शियम जैसे खनिज लवण भी काफी मात्रा में होते हैं जो दांतों व हड्डियों को मजबूत बनाते है. संतरे में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को संक्रमण से दूर रखने में कारगर होते हैं.

स्वाद से भरा संतरा संतरा खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है.संतरे के छिलके को उतार कर इसे फांको के रुप में खाया जाता है जो रस एवं गुदे से भरी होती हैं और खाने में स्वादिष्ट लगती हैं. संतरे का जूस बनाया जाता है इसके अलावा संतरे से फ्रूट चाट बनाई जाती है बाजार में संतरे के स्वाद वाली चटपटी गोलियां भी मिलती हैं जो खाने में मजेदार लगती है.संतरे को केक बनाने में तथा कई तरह के पेय पदार्थों में उपयोग किया जाता है.

संतरा स्वास्थ्यवर्धक फल संतरा अनेक रोगों के लिए रामबाण दवा है. इसके इस्तेमाल से दिल और दिमाग को ताजगी मिलती है पेट की बीमारी में इसका रस बहुत फ़ायदेमंद होता है यह पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है तथा कमजोर पाचन शक्ति वालों को इसके रस का अधिक सेवन करने से लाभ मिलता है यह भूख को बढाता है और हाजमा बेहतर करता है. कब्ज होने पर इसका रस पीने से कब्ज दूर होती है.बुखार में भी इसका रस बहुत लाभ करता है।

सौंदर्य बढाता संतरा संतरा स्वास्थ के साथ-साथ सुंदरताके लिए भी गुणकारी है. संतरे का रस रोजाना सेवन करने से खून की कमी दूर होती है इसके साथ ही संतरा रक्तशोधक का काम करता है जिससे तव्चा के रोग नही होते हैं कील-मुंहासों से छुटकारा मिलता है और चहरे की झाइयाँ व संवालापन दूर होता है.हाथ-पैर की जलन आदि में संतरे के छीलके को मलने से लाभ मिलता है.

संतेरे के छिलके को धुप में सुखाकर पीस लें और इस चूर्ण में गुलाब जल और कच्चे दूध को मिलाकर इसका का उबटन बनाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा चिकनी और मुलायम बनती है.संतरे के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है, त्वचा में निखार आता है तथा सौंदर्य में वृद्धि होती है.

संतरे का एक गिलास रस तन-मन को शीतलता प्रदान कर थकान एवं तनाव दूर करता है, हृदय तथा मस्तिष्क को नई शक्ति व ताजगी से भर देता है।


पेचिश की शिकायत होने पर संतरे के रस में बकरी का दूध मिलाकर लेने से काफी फायदा मिलता है।

संतरे का नियमित सेवन करने से बवासीर की बीमारी में लाभ मिलता है। रक्तस्राव को रोकने की इसमें अद्भुत क्षमता है।

तेज बुखार में संतरे के रस का सेवन करने से तापमान कम हो जाता है। इसमें उपस्थित साइट्रिक अम्ल मूत्र रोगों और गुर्दा रोगों को दूर करता है।

दिल के मरीज को संतरे का रस शहद मिलाकर देने से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।

संतरे के सेवन से दाँतों और मसूड़ों के रोग भी दूर होते हैं।

छोटे बच्चों के लिए तो संतरे का रस अमृततुल्य है। उन्हें स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ट बनाने के लिए दूध में चौथाई भाग मीठे संतरे का रस मिलाकर पिलाने से यह एक आदर्श टॉनिक का काम करता है।

जब बच्चों के दाँत निकलते हैं, तब उन्हें उल्टी होती है और हरे-पीले दस्त लगते हैं। उस समय संतरे का रस देने से उनकी बेचैनी दूर होती है तथा पाचन शक्ति भी बढ़ जाती है।

पेट में गैस, अपच, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप, गठिया, बेरी-बेरी रोग में भी संतरे का सेवन बहुत कुछ लाभकारी होता है।

गर्भवती महिलाओं तथा यकृत रोग से ग्रसित महिलाओं के लिए संतरे का रस बहुत लाभकारी होता है। इसके सेवन से जहाँ प्रसव के समय होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है, वहीं प्रसव पीड़ा भी कम होती है। बच्चा स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ट पैदा होता है।

संतरे का सेवन जहाँ जुकाम में राहत पहुँचाता है, वहीं सूखी खाँसी में भी फायदा करता है। यह कफ को पतला करके बाहर निकालता है।

संतरे के सूखे छिलकों का महीन चूर्ण गुलाब जल या कच्चे दूध में मिलाकर पीसकर आधे घंटे तक लेप लगाने से कुछ ही दिनों में चेहरा साफ, सुंदर और कांतिमान हो जाता है। कील मुँहासे-झाइयों व साँवलापन दूर होता है।

संतरे के ताजे फूल को पीसकर उसका रस सिर में लगाने से बालों की चमक बढ़ती है। बाल जल्दी बढ़ते हैं और उसका कालापन बढ़ता है।

संतरे के छिलकों से तेल निकाला जाता है। शरीर पर इस तेल की मालिश करने से मच्छर आदि नहीं काटते।

बच्चे, बूढ़े, रोगी और दुर्बल लोगों को अपनी दुर्बलता दूर करने के लिए संतरे का सेवन अवश्य करना चाहिए।

संतरे के मौसम में इसका नियमित सेवन करते रहने से मोटापा कम होता है और बिना डायटिंग किए ही आप अपना वजन कम कर सकते हैं।

इस तरह संतरा सेहत को ही नहीं, खूबसूरती को भी संवारता है। हमेशा पके व मीठे संतरे का ही सेवन करना चाहिए। गर्मियों में संतरे की फसल अपने पूरे जोर पर होती है।

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