Star Masti Group

Please Visit Our Web Site
.
GURUTVA JYOTISH
A Part of  GURUTVA KARYALAY
Monthly Astrology Magazines
.
You Can Read In Monthly Rashi Phal, Panchang, Festivle Deatail, Auspicious Yog, Astrology, Numerology, Vastu, Mantra, Yantra, Tantra, Easy Remedy Etc, Related Article,
Non Profitable Publication  by Public Intrest Call us : 91+9338213418, 91+9238328785
Ad By : SWASTIK SOFTECH INDIA
GURUTVA JYOTISH
Monthly Astrology Magazines
New
New
New
A Part of  GURUTVA KARYALAY
Non Profitable Publication by Public Intrest
Call: 91+9338213418, 91+9238328785

Monday, October 24, 2011

धन तेरस शुभ मुहूर्त (24 अक्तूबर, 2011)

धनतेरस, धन त्रयोदशी, धनतेरस लक्ष्मी पूजन, लक्ष्मी पूजा, धनत्रयोदशीधनवंतरि, धनतेरस के शुभ मुहूर्त, धनतेरस शुभ महूरत, धनतेरस की पूजा, धनतेरस पर दीपदानलक्ष्मी पुजन, लक्ष्मी पुजा, ધનતેરસ, ધન ત્રયોદશી, ધનતેરસ લક્ષ્મી પૂજન, લક્ષ્મી પૂજા, ધનત્રયોદશીધનવંતરિ, ધનતેરસ કે શુભ મુહૂર્ત, ધનતેરસ શુભ મહૂરત, ધનતેરસ કી પૂજા, ધનતેરસ પર દીપદાનલક્ષ્મી પુજન, લક્ષ્મી પુજા, ಧನತೇರಸ, ಧನ ತ್ರಯೋದಶೀ, ಧನತೇರಸ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಪೂಜನ, ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಪೂಜಾ, ಧನತ್ರಯೋದಶೀಧನವಂತರಿ, ಧನತೇರಸ ಕೇ ಶುಭ ಮುಹೂರ್ತ, ಧನತೇರಸ ಶುಭ ಮಹೂರತ, ಧನತೇರಸ ಕೀ ಪೂಜಾ, ಧನತೇರಸ ಪರ ದೀಪದಾನಲಕ್ಷ್ಮೀ ಪುಜನ, ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಪುಜಾ, தநதேரஸ, தந த்ரயோதஶீ, தநதேரஸ லக்ஷ்மீ பூஜந, லக்ஷ்மீ பூஜா, தநத்ரயோதஶீதநவம்தரி, தநதேரஸ கே ஶுப முஹூர்த, தநதேரஸ ஶுப மஹூரத, தநதேரஸ கீ பூஜா, தநதேரஸ பர தீபதாநலக்ஷ்மீ புஜந, லக்ஷ்மீ புஜா, ధనతేరస, ధన త్రయోదశీ, ధనతేరస లక్ష్మీ పూజన, లక్ష్మీ పూజా, ధనత్రయోదశీధనవంతరి, ధనతేరస కే శుభ ముహూర్త, ధనతేరస శుభ మహూరత, ధనతేరస కీ పూజా, ధనతేరస పర దీపదానలక్ష్మీ పుజన, లక్ష్మీ పుజా, ധനതേരസ, ധന ത്രയോദശീ, ധനതേരസ ലക്ഷ്മീ പൂജന, ലക്ഷ്മീ പൂജാ, ധനത്രയോദശീധനവംതരി, ധനതേരസ കേ ശുഭ മുഹൂര്ത, ധനതേരസ ശുഭ മഹൂരത, ധനതേരസ കീ പൂജാ, ധനതേരസ പര ദീപദാനലക്ഷ്മീ പുജന, ലക്ഷ്മീ പുജാ, ਧਨਤੇਰਸ, ਧਨ ਤ੍ਰਯੋਦਸ਼ੀ, ਧਨਤੇਰਸ ਲਕ੍ਸ਼੍ਮੀ ਪੂਜਨ, ਲਕ੍ਸ਼੍ਮੀ ਪੂਜਾ, ਧਨਤ੍ਰਯੋਦਸ਼ੀਧਨਵਂਤਰਿ, ਧਨਤੇਰਸ ਕੇ ਸ਼ੁਭ ਮੁਹੂਰ੍ਤ, ਧਨਤੇਰਸ ਸ਼ੁਭ ਮਹੂਰਤ, ਧਨਤੇਰਸ ਕੀ ਪੂਜਾ, ਧਨਤੇਰਸ ਪਰ ਦੀਪਦਾਨਲਕ੍ਸ਼੍ਮੀ ਪੁਜਨ, ਲਕ੍ਸ਼੍ਮੀ ਪੁਜਾ,ধনতেরস, ধন ত্রযোদশী, ধনতেরস লক্ষ্মী পূজন, লক্ষ্মী পূজা, ধনত্রযোদশীধনৱংতরি, ধনতেরস কে শুভ মুহূর্ত, ধনতেরস শুভ মহূরত, ধনতেরস কী পূজা, ধনতেরস পর দীপদানলক্ষ্মী পুজন, লক্ষ্মী পুজা, ଧନତେରସ, ଧନ ତ୍ରଯୋଦଶୀ, ଧନତେରସ ଲକ୍ଷ୍ମୀ ପୂଜନ, ଲକ୍ଷ୍ମୀ ପୂଜା, ଧନତ୍ରଯୋଦଶୀଧନବଂତରି, ଧନତେରସ କେ ଶୁଭ ମୁହୂର୍ତ, ଧନତେରସ ଶୁଭ ମହୂରତ, ଧନତେରସ କୀ ପୂଜା, ଧନତେରସ ପର ଦୀପଦାନଲକ୍ଷ୍ମୀ ପୁଜନ, ଲକ୍ଷ୍ମୀ ପୁଜା, Dhanteras 2011, 24 October, Subh Muhurat, auspicious timings,  Dhanteras 2011, dhanteras celebrations, dhanteras diwali, dhanteras puja, dhanteras pujan, Lakshmi Puja, Laxmi poojaa, Dhanteras - Festival of Wealth, Festival History and Information, Dhanwantari Trayodashi, auspicious timings for Hindu festival Dhanteras,
धन तेरस शुभ मुहूर्त (24 अक्तूबर, 2011)
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर-2011)

एसी पौराणिक मान्यता हैं कि धन तेरस के दिन धनवंतरी नामक देवता अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। धनवंतरी धन, स्वास्थय आयु के अधिपति देवता हैं। धनवंतरी को देवों के वैध चिकित्सक के रुप में जाना जाता हैं। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
धन तेरस के दिन चांदी के बर्तन-सिक्के खरीदना विशेष शुभ होता हैं। क्योकि शास्त्रों में धनवंतरी देव को चंद्रमा के समान माना गया हैं। धन तेरस के धनवंतरी के पूजन से मानसिक शान्ति, मन में संतोष एव स्वभाव में सौम्यता का भाव आता हैं। जो लोग अधिक से अधिक धन एकत्र करने कि कामना करते हों उन्हें धनवंतरी देव कि प्रतिदिन आराधना करनी चाहिए। धनतेरस पर पूजा करने से व्यक्ति में संतोषस्वास्थय, सुख धन कि विशेष प्राप्ति होती हैं। जिन व्यक्तियों के उत्तम स्वास्थय में कमी तथा सेहत खराब होने कि आशंकाएं बनी रहती हैं उन्हें विशेष रुप से इस शुभ दिन में पूजा आराधना करनी चाहिए। धनतेरस में खरीदारी शुभ मानी जाती हैं। लक्ष्मी जी एवं गणेश जी कि चांदी कि प्रतिमा-सिक्को को इस दिन खरिदना ……………..>>
>> Read Full Article Please Read GURUTVA JYOTISH  OCT-2011GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
धन तेरस पूजा मुहूर्त GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
 प्रदोष काल 2 घण्टे एवं 24 मिनट का होता हैं। अपने शहर के सूर्यास्त समय अवधि से लेकर अगले 2 घण्टे 24 मिनट कि समय अवधि को प्रदोष काल माना जाता हैं। अलग- अलग शहरों में प्रदोष काल के निर्धारण का आधार सूर्योस्त समय के अनुशार निर्धारीत करना चाहिये। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है । GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
इस वर्ष 24 अक्तूबर, 2011 (धनतेरस) को भारतीय समय अनुशार नई दिल्ली में संध्या सूर्यास्त के बाद 05 बज कर 44 मिनिट से आरम्भ होकर रात के 08 बजकर 06 मिनट तक का समय प्रदोष काल रहेगा। इस समया अवधि में स्थिर लग्न  (वृषभ) भी मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
24 अक्तूबर, 2011 को प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न (वृषभ राशि) हो रहा हैं, स्थिर लग्न का समय सबसे उतम माना जाता हैं। धन तेरस के दिन प्रदोष काल स्थिर लग्न दोनों का संयोग संध्या 06:54:31 बजे से लेकर रात्री ……………..>>
>> Read Full Article Please Read GURUTVA JYOTISH  OCT-2011
GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
चौघाडिया मुहूर्त GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
·    अमृत मुहूर्त सुबह 06:10 से 07:37 तक GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
·    शुभ मुहूर्त सुबह 09.04 से 10:32 तक
·                     ·    चल मुहूर्त दोपहर 01:34 से 02:58 तक
·                    ·         लाभ मुहूर्त दोपहर ………
·                    ·          अमृत मुहूर्त दोपहर………. KARYALAY | GURUTVA JY...OTISH
·    चल मुहूर्त संध्या……….
·                     ·   लाभ मुहूर्त रात्री  …….……………..>>
>> Read Full Article Please Read GURUTVA JYOTISH  OCT-2011

शुभ महूर्त का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा। लाभ मुहूर्त पूजन करने से प्राप्त होने वाले लाभों में वृद्धि होती हैं। शुभ काल मुहूर्त कि शुभता से धन, स्वास्थय आयु में वृद्धि होती हैं। सबसे अधिक शुभ अमृत काल में पूजा करने का होता हैं। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
नोट: उपरोक्त वर्णित सूर्यास्त का समय निरधारण नई दिल्ली के अक्षांश रेखांश के अनुशार आधुनिक पद्धति से किया गया हैं। इस विषय में विभिन्न मत एवं सूर्यास्त ज्ञात करने का तरीका भिन्न होने के कारण सूर्यास्त समय का निरधारण भिन्न हो सकता हैं। सूर्यास्त समय का निरधारण स्थानिय सूर्यास्त के अनुशार हि करना उचित होगा।

>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2011)
OCT-2011

पाठको की पसंद

Thursday, October 20, 2011

गुरु पुष्यामृत योग (20- October- 2011)

Guru Pushya Yoga/Guru Pushyaamrut Yoga, guru prushiyami yoga, guru pushya nakshatra, गुरु पुष्य योग, गुरु पुष्य नक्षत्र, 20- October- 2011, 20- अक्टूबर -2011
गुरु पुष्यामृत योग

20-अक्टूबर-2011 को प्रात:10:46 से से पुष्य नक्षत्र प्रारंभ हो रहा है। और दिन-रात रहेगा |

गुरु पुष्य योग के बारे में अधिक जानकारी हेतु इस लिंक परा क्लिक करें।


>>  गुरु पुष्य योग
>>  http://gurutvakaryalay.blogspot.com/2009/12/blog-post_2941.html

>> गुरु पुष्यामृत
>>  http://gurutvakaryalay.blogspot.com/2009/12/blog-post_18.html

>> गुरु पुष्य योग का महत्व
>> http://gurutvakaryalay.blogspot.com/2010/12/blog-post_23.html

Monday, October 10, 2011

शरद पूर्णिमा आरोग्य प्राप्ति हेतु उत्तम हैं।

सरद पूर्णीमा2011,  Sharad Purnima (Harvest moon) good for Health recovery 2011 ,
शरद पूर्णिमा (11-अक्टूबर-2011)

लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर-2011)

हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे वर्ष में बारह पूर्णिमा आती हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। पूर्णिमा पर चंद्रमा का अतुल्य सौंदर्य देखते ही बनता है। विद्वानो के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण आकार में होने के कारण वर्ष में आने वाली सभी पूर्णिमा पर्व के समान हैं। लेकिन इन सभी पूर्णिमा में आश्विन मास कि पूर्णिमा सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। यह पूर्णिमा शरद ऋतु में आने के कारण इसे शरद पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद ऋतु की इस पूर्णिमा को पूर्ण चंद्र का अश्विनी नक्षत्र से संयोग होता है। अश्विनी जो नक्षत्र क्रम में प्रथम नक्षत्र हैं, जिसके स्वामी अश्विनीकुमार है GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
कथा के अनुशार च्यवन ऋषि को आरोग्य का पाठ और औषधि का ज्ञान अश्विनीकुमारों ने ही दिया था। यही ज्ञान आज हजारों वर्ष बाद भी हमारे पास अनमोल धरोहर के रूप में संचित है। अश्विनीकुमार आरोग्य के स्वामी हैं और पूर्ण चंद्रमा अमृत का स्रोत। यही कारण है कि ऐसा माना जाता है कि इस पूर्णिमा को ब्रह्मांड से अमृत की वर्षा होती है। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
खीर का भोग GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
शरद पूर्णिमा की रात में गाय के दूध से बनी खीर को चंद्रमा कि चांदनी में रखकर उसे प्रसाद-स्वरूप ग्रहण किया जाता है। पूर्णिमा की चांदनी में 'अमृत' का अंश होता है, इस लिये मान्यता यह है कि ऐसा करने से चंद्रमा की अमृत की बूंदें भोजन में आ जाती हैं जिसका सेवन करने से सभी प्रकार की बीमारियां आदि दूर हो जाती हैं। आयुर्वेद के ग्रंथों में भी इसकी चांदनी के औषधीय महत्व का वर्णन मिलता है। रखकर दूध से बनी खीर को चांदनी के में असाध्य रोगों की दवाएं खिलाई जाती है। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
शरद पूर्णिमा की कथा: GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
एक साहुकार के दो पुत्रियाँ थी। दोनो पुत्रियाँ शरद पुर्णिमा का व्रत रखती थी। परन्तु बडी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधुरा व्रत करती थी। परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की सन्तान पैदा होते ही मर जाती थी। उसने पंडितो से इसका कारण पूछा तो उन्होने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी जिसके कारण तुम्हारी सन्तान पैदा होते ही मर जाती हैं। पूर्णिमा का पुरा विधिपुर्वक करने से तुम्हारी सन्तान जीवित रह सकती हैं। उसने पंतिडतो कि सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। उसके लडका हुआ परन्तु शीघ्र ही मर गया । उसने लडके को लकडी के पट्टे पर लिटाकर ऊपर से कपडा ढक दिया। फिर बडी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पट्टा दे दिया। बडी बहन जब पीढे पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया, बच्चा घाघरा छुते ही रोने लगा। बडी बहन बोली तुम मुझे कंलक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता तब छोटी बहन बोली यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह पुनः जीवित हो गया हैं । तेरे पुण्य से ही यह अभी जीवित हुआ हैं। उसके बाद से शरद पुर्णिमा का पूरा व्रत करने का प्रचलन चल निकला। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2011)
OCT-2011

Wednesday, October 5, 2011

मां सिद्धिदात्री के पूजन से ऋद्धि, सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं

the siddhidatri mother worship give Riddhi-Siddhi. The worship of Maa Siddhidatri gets Fame, power and money, Get money,  Fame And power to The worship of Maa Siddhidatri,  Money, wealth, happiness and peace is achieved from the worship of mother Siddhidatri,  Money, wealth, joy and peacefully,  joy and tranquility,   nineth day of navratra, ninth day of navratri, saardiya navratra sep-2011, sharad-navratri, navratri, Second-navratri, navratri-2011, navratri-puja, navratra-story, navratri-festival, navratri-pooja, navratri puja-2011,  Durga Pooja, durga pooja 2011, Navratri Celebrations 28 sep 2011, मां सिद्धिदात्री के पूजन से ऋद्धि, सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं।, मां सिद्धिदात्री का पूजन बाधा एवं विध्न (विघ्नों) का नाश करता हैं।, मां सिद्धिदात्रि की पूजा से यश, बल और धन प्राप्त होता हैं।, नवम नवरात्र, नवरात्र का नौवां दिन माता महागौरी का पूजन, नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा, नवरात्र व्रत, नवरात्र प्रारम्भ, नवरात्र महोत्सव, नवरात्र पर्व, नवरात्रि, नवरात्री, नवरात्रि पूजन विधि, सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं, शारदीय नवरात्रि का त्योहार
नवम् सिद्धिदात्री
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर-2010)


नवरात्र के  नौवें दिन मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं।
देवी  सिद्धिदात्री का स्वरूप कमल आसन पर विराजित, चार भुजा वाला, दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा, बाई तरफ से नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प सुशोभित रहते हैं।

मंत्र : सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

ध्यान:-
वन्दे वांछितमनरोरार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
कमलस्थिताचतुर्भुजासिद्धि यशस्वनीम्॥
स्वर्णावर्णानिर्वाणचक्रस्थितानवम् दुर्गा त्रिनेत्राम।
शंख, चक्र, गदा पदमधरा सिद्धिदात्रीभजेम्॥
पटाम्बरपरिधानांसुहास्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर, हार केयूर, किंकिणिरत्नकुण्डलमण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनापल्लवाधराकांत कपोलापीनपयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांक्षीणकटिंनिम्ननाभिंनितम्बनीम्॥

स्तोत्र:-
कंचनाभा शंखचक्रगदामधरामुकुटोज्वलां। स्मेरमुखीशिवपत्नीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
पटाम्बरपरिधानांनानालंकारभूषितां। नलिनस्थितांपलिनाक्षींसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
परमानंदमयीदेवि परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति,परमभक्तिसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
विश्वकतींविश्वभर्तीविश्वहतींविश्वप्रीता। विश्वर्चिताविश्वतीतासिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारणीभक्तकष्टनिवारिणी। भवसागर तारिणी सिद्धिदात्रीनमोअस्तुते।।
धर्माथकामप्रदायिनीमहामोह विनाशिनी। मोक्षदायिनीसिद्धिदात्रीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥

कवच:-
ओंकार: पातुशीर्षोमां, ऐं बीजंमां हृदयो। हीं बीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥ ललाट कर्णोश्रींबीजंपातुक्लींबीजंमां नेत्र घ्राणो। कपोल चिबुकोहसौ:पातुजगत्प्रसूत्यैमां सर्व वदनो॥

मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का निर्वाण चक्र जाग्रत होता हैं। सिद्धिदात्री के पूजन से व्यक्ति कि समस्त कामनाओं कि पूर्ति होकर उसे ऋद्धि, सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं। पूजन से यश, बल और धन कि प्राप्ति कार्यो में चले आ रहे बाधा-विध्न समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति को यश, बल और धन कि प्राप्ति होकर उसे मां कि कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष कि भी प्राप्ति स्वतः हो जाती हैं।

>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2010)
OCT-2010

Tuesday, October 4, 2011

मां महागौरी का पूजन धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करता हैं।

eight day of navratra, eight day of navratri, the Mahagauri mother worship money, wealth and happiness - peace offers. The worship of Maa mahagauri gets freedom from crisis,  Get money, wealth, happiness and peace to The worship of Maa mahagauri, Money, wealth, happiness and peace is achieved from the worship of mother mahagauri, trouble end, scrape was end, deadlock was end, distress was end, hazard was end, danger was end, difficulty was end, mischief was end, slip-up was end, nodus was end, riskiness was end, Money, wealth, joy and peacefully,  joy and tranquility saardiya navratra sep-2011, sharad-navratri, navratri, Second-navratri, navratri-2011, navratri-puja, navratra-story, navratri-festival, navratri-pooja, navratri puja-2011,  Durga Pooja, durga pooja 2011, Navratri Celebrations 28 sep 2011, मां महागौरी का पूजन संकट से मुक्ति दिलाता हैं, मां महागौरी का पूजन धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करता हैं। अष्ठम नवरात्र,
नवरात्र के आठवें दिन माता महागौरी का पूजन, नवरात्रि के आठवें दिन महागौरि की पूजा, नवरात्र व्रत, नवरात्र प्रारम्भ, नवरात्र महोत्सव, नवरात्र पर्व, नवरात्रि, नवरात्री, नवरात्रि पूजन विधि, सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं, शारदीय नवरात्रि का त्योहार,
अष्टम महागौरी
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर-2010)

नवरात्र के  आठवें दिन मां के महागौरी स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं। महागौरी स्वरूप उज्जवल, कोमल, श्वेतवर्णा तथा श्वेत वस्त्रधारी हैं। महागौरी मस्तक पर चन्द्र का मुकुट धारण किये हुए हैं। कान्तिमणि के समान कान्ति वाली देवी जो अपनी चारों भुजाओं में क्रमशः शंख, चक्र, धनुष और बाण धारण किए हुए हैं, उनके कानों में रत्न जडितकुण्डल झिलमिलाते रहते हैं। महागौरीवृषभ के पीठ पर विराजमान हैं। महागौरी गायन एवं संगीत से प्रसन्न होने वाली 'महागौरी' माना जाता हैं।

मंत्र:
श्वेते वृषे समरूढ़ा श्वेताम्बराधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

ध्यान:-
वन्दे वांछित कामार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहारूढाचतुर्भुजामहागौरीयशस्वीनीम्॥
पुणेन्दुनिभांगौरी सोमवक्रस्थितांअष्टम दुर्गा त्रिनेत्रम।
वराभीतिकरांत्रिशूल ढमरूधरांमहागौरींभजेम्॥
पटाम्बरपरिधानामृदुहास्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर, कार, केयूर, किंकिणिरत्न कुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांत कपोलांचैवोक्यमोहनीम्।
कमनीयांलावण्यांमृणालांचंदन गन्ध लिप्ताम्॥

स्तोत्र:-
सर्वसंकट हंत्रीत्वंहिधन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदाचतुर्वेदमयी,महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
सुख शांति दात्री, धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाघप्रिया अघा महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगलात्वंहितापत्रयप्रणमाम्यहम्।
वरदाचैतन्यमयीमहागौरीप्रणमाम्यहम्॥

कवच:-
ओंकार: पातुशीर्षोमां, हीं बीजंमां हृदयो। क्लींबीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥ ललाट कर्णो,हूं, बीजंपात महागौरीमां नेत्र घ्राणों। कपोल चिबुकोफट् पातुस्वाहा मां सर्ववदनो॥

मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का सोमचक्र जाग्रत होता हैं। महागौरी के पूजन से व्यक्ति के समस्त पाप धुल जाते हैं। महागौरी के पूजन करने वाले साधन के लिये मां अन्नपूर्णा के समान, धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करने वाली एवं  संकट से मुक्ति दिलाने वाली देवी महागौरी हैं।

>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2010)

OCT-2011

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...