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GURUTVA JYOTISH
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Thursday, April 28, 2011

Shanti Mantra (Very Peaceful ) Video

शांति मंत्र-विडिओ, शान्ति मन्त्र-विडियो,
શાંતિ મંત્ર-વિડિઓ, શાન્તિ મન્ત્ર-વિડિયો,
Shanti Mantra ( Peaceful )

ज्योतिष सीखें - भाग 2

Learn Astrology Part:2 (Hindi)
ज्योतिष सीखें - भाग 2
राशि, ग्रह, एवं राशि स्‍वामियों के बारे में जाना। वह अत्‍यन्‍त ही महत्‍वपूर्ण सूचना थी और उसे कण्‍ठस्‍थ करने की कोशिश करें। इस बार हम ग्रह एवं राशियों के कुछ वर्गीकरण को जानेंगे जो कि फलित ज्‍योतिष के लिए अत्‍यन्‍त ही महत्‍वपूर्ण हैं। पहला वर्गीकरण शुभ ग्रह और पाप ग्रह का इस
प्रकार है -
शुभ ग्रह: चन्द्रमा, बुध, शुक्र, गुरू हैं
पापी ग्रह: सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु हैं

साधारणत चन्‍द्र एवं बुध को सदैव ही शुभ नहीं गिना जाता। पूर्ण चन्‍द्र अर्थात पूर्णिमा के पास का चन्‍द्र शुभ एवं अमावस्‍या के पास का चन्‍द्र शुभ नहीं गिना जाता। इसी प्रकार बुध अगर शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ होता है और यदि पापी ग्रह के साथ हो तो पापी हो जाता है।
यह ध्‍यान रखने वाली बात है कि सभी पापी ग्रह सदैव ही बुरा फल नहीं देते। न ही सभी शुभ ग्रह सदैव ही शुभ फल देते हैं। अच्‍छा या बुरा फल कई अन्‍य बातों जैसे ग्रह का स्‍वामित्‍व, ग्रह की राशि स्थिति, दृष्टियों इत्‍यादि पर भी निर्भर करता है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।
जैसा कि उपर कहा गया एक ग्रह का अच्‍छा या बुरा फल कई अन्‍य बातों पर निर्भर करता है और उनमें से एक है ग्रह की राशि में स्थिति। कोई भी ग्रह सामान्‍यत अपनी उच्‍च राशि, मित्र राशि, एवं खुद की राशि में अच्‍छा फल देते हैं। इसके विपरीत ग्रह अपनी नीच राशि और शत्रु राशि में बुरा फल देते हैं।

ग्रहों की उच्‍चादि राशि स्थिति इस प्रकार है -

ग्रह
उच्च राशि
नीच राशि
स्‍वग्रह राशि
1
सूर्य,मेष
तुला
सिंह
2
चन्द्रमा,  वृषभ
वृश्चिक
कर्क
3
मंगल,   मकर
 कर्क
मेष, वृश्चिक
4
बुध, कन्या
मीन          
मिथुन, कन्या
5
 गुरू,   कर्क  
मकर 
 धनु, मीन
शुक्र,   मीन        
कन्या 
वृषभ, तुला
7
शनि,  तुला                मेष मकर, कुम्भ
8
 राहु, धनु           मिथुन
9
केतु    मिथुनधनु

उपर की तालिका में कुछ ध्‍यान देने वाले बिन्‍दु इस प्रकार हैं -
1 ग्रह की उच्‍च राशि और नीच राशि एक दूसरे से सप्‍तम होती हैं। उदाहरणार्थ सूर्य मेष में उच्‍च का होता है जो कि राशि चक्र की पहली राशि है और तुला में नीच होता है जो कि राशि चक्र की सातवीं राशि है।

2 सूर्य और चन्‍द्र सिर्फ एक राशि के स्‍वामी हैं। राहु एवं केतु किसी भी राशि के स्‍वामी नहीं हैं। अन्‍य ग्रह दो-दो राशियों के स्‍वामी हैं।

3 राहु एवं केतु की अपनी कोई राशि नहीं होती। राहु-केतु की उच्‍च एवं नीच राशियां भी सभी ज्‍योतिषी प्रयोग नहीं करते हैं।

क्रमश....

औषधि एक फायदे अनेक भाग: 4 (तुलसी-Tulsi)

औषधि एक फायदे अनेक भाग: 4 (तुलसी-Tulsi) One tulsi multiple benefits

तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और से फुट ऊँचा होता है।
इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ सो ढकी होती है। पत्तियाँ से इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते है और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता है। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था जाती है। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती है।

तुलसी की सामान्यतया निम्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
-ऑसीमम अमेरिकन (काली तुलसी) गम्भीरा या मामरी।
-ऑसीमम वेसिलिकम (मरुआ तुलसी) मुन्जरिकी या मुरसा।
-ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम।
-आसीमम ग्रेटिसिकम (राम तुलसी बन तुलसी)
-ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम (कर्पूर तुलसी)
-ऑसीमम सैक्टम तथा
-ऑसीमम विरिडी। इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है,

इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं-
श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं।

श्री तुलसी के पत्र तथा शाखाएँ श्वेताभ होते हैं जबकि कृष्ण तुलसी के पत्रादि कृष्ण रंग के होते हैं। गुण, धर्म की दृष्टि से काली तुलसी को ही श्रेष्ठ माना गया है, परन्तु अधिकांश विद्वानों का मत है कि दोनों ही गुणों में समान हैं।

तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और लोग इसे अपने घर के आँगन या दरवाजे पर या बाग में लगाते हैं।
[] भारतीय संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है।
[] इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी किसी रूप में प्रयोग किया जाता है।

Wednesday, April 27, 2011

Shri Lakshmi Narayan Stuti (Pandit Jasraj andAnuraag)

लक्ष्मी नारयण स्तुति- पंडित जसराज- अनुराग Shri Lakshmi Narayan Stuti - Pandit Jasraj - Anuraag Om Shri Lakshmi

Lakshmi Narayan Dhun ( NEW ) Video

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લક્ષ્મી નારાયણ ધુન (ગુજરાતી), लक्ष्मी नारायण धुन (गुजराती)
Lakshmi Narayan Dhun ( Gujarati )



हर सपने कुछ कहते हैं? भागा: 3

स्वप्न फल, रहस्य Meaning, dreams analysis: Part:3
हर सपने कुछ कहते हैं? भागा: 3
all the dreams say Something ?


आप रात्री काल में गहरी नींद में सो रहे है और स्वप्न में आप देखते है कि कुम्हार घड़ा बना रहा है. तो समझ लीजिए कि अब आपके कष्टों के दिन दूर होने वाले है . इस स्वप्न का फल अत्यंत ही शुभ और समृद्धिदायक होता है. और यदि स्वप्न में आप अपने से उच्चस्थ पदस्थ पुरुष या अधिकारी से अशिष्टता से बात कर रहे है या अभद्र व्यवहार कर रहे है तो आपके लिए इस स्वप्न का फल शुभ है आप जो भी व्यवसाय या कार्य कर रहे होते है उसमें दिनोंदिन उन्नति होनी आरम्भ हो जायेगी.

यदि आप स्वप्न में देखते है कि आपका मकान मालिक आपसे किराया मांग रहा है तो समझ लीजिए कि इस स्वप्न का फल अति उत्तम है. भविष्य में आप खुद का मकान लेने वाले है या आपके व्यवसाय या नौकरी में उन्नति होने वाली है. यदि स्वप्न में आपको अचानक ही छींक आती है और आप फ़ौरन ही अपने रुमाल से अपनी नाक साफ़ करने लगे है तो इस स्वप्न का फल आपके लिए अति उत्तम और ऐश्वर्यशाली है. भविष्य में आपकी आय में वृद्धि होगी. या आय का दूसरा स्रोत मिलेगा. जिससे आपका काया कल्प होने वाला है.

यदि आप स्वप्न में किसी बच्चे को गोद में लेते है तो स्वप्न शुभ फलदायक होता है. आपको भविष्य में जुए, लॉटरी या सट्टे से बगैर कमाए ही धन मिल सकता है.

यदि आप स्वप्न में देखते है कि एक शेर आपके सामने आकार गर्जना कर रहा है.आपकी आँखे डर के मारें सहसा ही खुल जाती है. आप जितना डरे हुएं है उतना ही स्वप्न आपके लिए शुभ होगा. आने वाले दिनों में आपको अनेक सुन्दर स्त्रियों का स्नेह और शारीरिक सुख मिलने वाला है....

शास्त्रों के अनुसार यदि अशुभ स्वप्न किसी भी प्रकार का हो या हमे पता नहीं है कि यह स्वप्न शुभ है या अशुभ है. उसका फल हमारे लिए अशुभ ना हो इसलिए इस दोष के निवारण के लिए प्रातःकाल किसी दूध देने वाली गाय को हरा चारा, घांस आदि डाल कर प्रार्थना कर दे इससे स्वप्न के दोष की निवृति होगी............

गणेश फोटो, वोलपेपर (Lord Ganesha)

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